मेरे पापा (कविता)
मेरे पापा
(पिता के प्रति बेटे का उद्गार)
ना थके हो न हारे हो,
जीवन से लड़ने वाले हो,
पापा आप ही हमारे जीवन बनाने वाले हो।
आपने जो दिया है,
वो मैं कभी न दे पाऊँगा,
बस मैंने एक कविता लिखी है,
वो मैं सुनाऊँगा।
हमारी खव्वाहिशों को पूरा करने को,
खुद कष्ट उठाते हो।
जीवन में हँसना सीखो,
जीवन से तुम लड़ना सीखो,
हमें यही सीखाते हो,
हमारी खव्वाहिश पूरी करने को,
खुद को रुलाते हो।
आपकी उगंलियों को पकड़कर,
मैंने चलना सीखा है,
आपके कंधे पर चढ़कर,
मैंने जीवन का सफर करना सीखा है।
पापा आप हमारी खुशी के लिए,
हर गम में मुस्कुराते हो,
चेहरे पर हँसी रखकर,
अंदर ही अंदर खुद को रुलाते हो।
मैंने जो लिया है,
शायद वो मैं न दे पाऊँगा,
पापा मैंने एक कविता लिखी है,
वो मैं सुनाऊँगा।
आलसी हो कामचोर हो,
कहते है ये लोग सारे,
पर मेरे पापा मेरे हिरो है,
ये मेरा दिल माने।
आज आपके इस जन्मदिन के शुभ अवसर पर,
रब से मेरी एक दुआ है,
लग जाए मेरी उम्र आपको,
छु सके न कोई गम आपको,
क्योंकि आप ही मेरे खुदा है।
नए कपड़े हमें पहनाते,
खुद पुराने पहनते हो,
हर पर्व हर त्योहार में,
आप यही करते हो।
हमारी जरुरत पूरी करने को,
खुद कर्ज उठाते हो,
आप हमारी खुशी के लिए,
हर गम में मुस्कुराते हो।
हमें अच्छे-अच्छे पकवान खिलाते,
खुद सूखी खाते हो,
खुद भूखे रहकर भी,
हमें आप खिलाते हो।
जैसे पेड़ धूप में रहकर भी,
दूसरों को छाया देता है,
उसी प्रकार आप कष्ट सहकर भी,
हमें खुशियाँ देते हो।
न शिव है न विष्णु है,
आप ही मेरे ईश्वर है,
आपने ही बनाया मुझे,
आप ही मेरे दाता हो।
दूर रहकर भी पास हो,
मेरी दिल की धड़कन आप हो,
जो माँगा है खुदा से,
वो चीज आप हो।
झूठ कहूँ तो सबकुछ है मेरे पास,
और सच कहूँ तो आपके सिवा,
कुछ नहीं है खास।
ना थके हो न हारे हो,
जीवन से लड़ने वाले हो,
पापा आप ही हमारे जीवन बनाने वाले हो।
आपने जो दिया है,
वो मैं कभी न दे पाऊँगा,
बस मैंने एक कविता लिखी है,
वो मैं सुनाऊगा।
बस मैंने एक कविता लिखी है,
वो मैं सुनाऊँगा।
-नितिन नयन
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